रिलीज से पहले ही कोर्ट-कचहरी! ‘Ghushkhor Pandit’ बनी ‘Legal Thriller’

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

Netflix पर आने वाली फिल्म ‘Ghushkhor Pandit’ अभी रिलीज भी नहीं हुई — और उससे पहले ही ये फिल्म police station से लेकर court room तक पहुंच चुकी है। Title और content को लेकर धार्मिक और जातिगत भावनाएं आहत करने के आरोपों के बाद Lucknow के Hazratganj थाने में FIR दर्ज कर ली गई है।

FIR में क्या आरोप लगे?

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फिल्म एक विशेष जाति/समुदाय (Brahmin) को आपत्तिजनक संदर्भ में दिखाती है। Social harmony को नुकसान पहुंचा सकती है। Public order बिगाड़ने और वैमनस्य फैलाने की आशंका पैदा करती है। Hazratganj पुलिस ने सोशल मीडिया पर उठी चिंताओं का संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया।

Sections कौन-कौन से लगे?

इस केस में Bharatiya Nyaya Sanhita (2023) की धारा 196, 299, 352, 353 IT Act (Amendment) 2008 की धारा 66 के तहत FIR दर्ज की गई है।
Lucknow Police Commissionerate ने साफ किया है कि यह कार्रवाई CM Yogi Adityanath की Zero Tolerance Policy के तहत की गई है।

सड़क से कोर्ट तक विरोध

विवाद सिर्फ FIR तक सीमित नहीं रहा Bhopal में protests हुए। Film की release पर ban की मांग तेज हुई। Delhi High Court में भी याचिका दाखिल, जिसमें कंटेंट को objectionable बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई। यानि, ये फिल्म अब सिर्फ cinema नहीं रही — ये एक social-legal flashpoint बन चुकी है।

आरोप क्या हैं फिल्म पर?

आरोप है कि Title में इस्तेमाल शब्द “Pandit” को derogatory तरीके से पेश किया गया। Trailer और कुछ scenes से caste-based stereotyping का संकेत मिलता है। इससे धार्मिक भावनाएं भड़क सकती हैं और social tension पैदा हो सकता है। Critics का कहना है 
Creative freedom और social responsibility के बीच की लाइन blur हो गई है।

Neeraj Pandey की सफाई

Director Neeraj Pandey ने official statement में कहा, “यह एक fictional police drama है। ‘Pandit’ शब्द सिर्फ एक fictional character का colloquial name है। हमारा किसी समुदाय को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था।”

उन्होंने यह भी कहा कि लोगों की भावनाओं को समझते हुए फिलहाल सभी promotional materials हटाने का फैसला लिया गया है। Film को पूरे context में देखा जाना चाहिए, न कि snippets के आधार पर judge किया जाए।

Manoj Bajpayee ने भी तोड़ी चुप्पी

Actor Manoj Bajpayee ने X (Twitter) पर लिखा “लोगों की चिंताओं को मैं गंभीरता से लेता हूं। जब किसी काम से किसी को ठेस पहुंचती है, तो रुककर सुनना जरूरी हो जाता है।”

उन्होंने साफ किया कि उनका किरदार एक flawed individual की journey दिखाता है। इसका उद्देश्य किसी community पर टिप्पणी करना नहीं था। Neeraj Pandey हमेशा sensitivity और responsibility के साथ काम करते हैं।

सवाल अब भी कायम

रिलीज से पहले promotion हटाना एक बड़ा कदम है, लेकिन सवाल वही है क्या यह controversy misunderstanding है या messaging failure?

Creative liberty कहां खत्म होती है और social accountability कहां शुरू? फिलहाल, ‘Ghushkhor Pandit’ cinema halls में नहीं, बल्कि legal spotlight में है।

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